मेरे जज़्बात- कुछ अल्फ़ाज़

कुछ लफ़्ज़ों में लिख लिया करता हूँ, जब तेरी याद आती है

अपने आँसू खुद ही पोंछ लिया करता हूँ, जब तेरी याद आती है

I write a few words, when I remember you
I wipe my own tears, when I remember you

मैं अक्सर जज़्बाती हो जाया करता हूँ 

तेरा ज़िक्र मुझे मेरी तन्हाई की याद दिला जाता है 

लम्हे, अक्सर तेरी कुछ बातें मेरे ज़ेहन में कौंधती रहती हैं 

इशारे, तेरी छुअन, तेरी हथेलियों की नमी 

सब भाग के आ जाती हैं 

और बैठ जाती हैं मेरी पुरानी कुर्सी के साथ, 

नहीं तो पलंग पर रखे सफ़ेद सिरहाने के पास 

कभी कहीं कोई तस्वीर तेरी, धकेल देती है मुझे 

पीछे 

कभी बहुत दूर 

तेरी मुस्कराहट, होठों की लाली, तेरी एक लट 

और घुंघराले बालों की भीनी भीनी खुशबू 

एक जादू सा है या एक नशा है अपने आप में 

वक़्त ये सच है या वो एक सपना था, पूछता हूँ खुद से 

जिस चाँद की रोशनी में तुझे ताका करता था 

वो भी अजनबियों जैसा बर्ताव करती है 

या तो सब वैसा ही है 

बस मैं ही बदला हूँ शायद 

जो मैं अक्सर जज़्बाती हो जाया करता हूँ 

इन छोटी छोटी बातों को ले कर!!!