पुरानी यादों की दस्तक

फिर ले आया दिल खोल के वो बंद हो गया पन्ना
किसी किताब के बीच में मोड़ के रखा था दुबारा खोल के देखने के लिए
यादों कि चुटकी बिखेर गया नीरस से जीवन में
पतझड़ के पेड़ों के बीच में जैसे फूलों सी महक बिखेरते हुए
उस किताब पे सिर रख के सो गए थे गहरी नींद
ऐसा लगा जैसे सपनो कि दुनिया में भूल ही गए हक़ीक़त को बदलते हुए
वो बंद पड़ी अलमारियाँ यकायक खुलने लगी जैसे अपने आप
जादू के लम्हे की तरह हम कुछ पीछे चले गए अचनचेत से
कल के अँधेरे में डर सा लगता है और आराम भी मिलता है अजीब सा
हिम्मत बता नहीं पा रही है कि और चल पायेगी मेरे संग
उम्मीद के चिराग में बढ़ते जा रहे हैं रास्ते को खोजते
लगता है कभी पुरानी सड़क पे जा के खुलेंगी ये गलियां
उन गलियों में पुराने लोगों के बीच उन्ही लम्हों में
जहाँ रंग खूबसूरत थे और बातें सपनो की होती थी
आसमान में उड़ने की ख्वाहिशें अपने पंख फड़फड़ाती हुई
भूल जाती थी कि उड़ने वाले गिर के ही ज़मीन पे वापिस आते हैं

An old letter from 26/12/2013

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