वैसे तो यूँ अच्छा ही हुआ

 
इक मुलाकात हुई और फिर मोहब्बत भी हो गयी
परवान यूँ हुई तो दीवानगी बे-आबरू हो आई
गुस्ताख़ी हुई, दरमियाँ-ए-इश्क़ क़ुबूल हो गयी
अकस्माक एक दिन रास्ते यूँ बदल गये
वैसे तो यूँ अच्छा ही हुआ
 
रास्ते बदले तो ना फिर सामना हुआ
ना सामना हुआ, ना मुलाक़ात हुई
अरसा ही हो गया तुझे देखे
ना गुफ्तगू हुई ना कभी फिर तेरी बात सुनी
वैसे तो यूँ अच्छा ही हुआ
 
सपने देखे थे संग आशियाना बनाने के
जो रास्ते बदले तो सपने रह गये
टटोले हमने, देखने के लिए अगर कुछ बचा है इनमें
पर तेरे वादों की तरह खाली ही मिले
वैसे तो यूँ अच्छा ही हुआ
 
हाथ थामें, पगडंडियाँबदल गयी
साथी बदले, बातें भी बदल ही गयी
अच्छा हुआ जो तुम्हारे सपने भी बदल ही गये
तुम पूरा करते मेरे बिना तो खलता कहीं
वैसे तो यूँ अच्छा ही हुआ
 
ना तू है ना है रुसवाई तेरी
ना है मोहब्बत ना बेवफ़ाई तेरी
ना है वो जन्नत कहीं जो कहता था हमारी होगी
ना ही वो झूठ की खुदाई तेरी
वैसे तो यूँ अच्छा ही हुआ