ओझल हो जाएँगे

  कहा था तुमसे, एक दिन यूँ ही बातों बातों में, समंदर के किनारे जब बैठ के देख रहे थे आती जाती लहरों को   आएँगे कभी चुपके से देखेंगे तुझे दूर से और लौट जाएँगे तुझसे ना कहेंगे ना बतलाएँगे कन्नी से देखेंगे अपनी और यूँ ओझल हो जाएँगे   अगर कभी ढुंढोगे ना […]

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कहा था तुमसे, एक दिन

यूँ ही बातों बातों में, समंदर के किनारे

जब बैठ के देख रहे थे आती जाती लहरों को

आएँगे कभी चुपके से

देखेंगे तुझे दूर से

और लौट जाएँगे

तुझसे ना कहेंगे

ना बतलाएँगे

कन्नी से देखेंगे अपनी

और यूँ ओझल हो जाएँगे

अगर कभी ढुंढोगे

ना मिलेंगे

ना ही मिल पाएँगे

आँख के कोने से कभी अगर बहा एक अश्क

पोंछ के उसे ज़रा मुस्कुराएँगे

समझ जाएँगे

हर कहानी के मुकाम मे

अपना फलसफा गुनगुनाएँगे

ना समझा कोई ना समझेगा

अधूरेपन मे ही इसे पूरा कर जाएँगे

और जब एक दिन रुखसत मे दिल से बुलाएगा

तुझे हम बड़ा याद आएँगे

बस यूँ ही हम तुझे सताएँगे

और फिर बस यूँ ही ओझल हो जाएँगे

A Delusion!!

I’m dreaming of something,

Something,

that is,

may be,

just impossible.
Running after it,

Chasing it,

mindlessly.
I did not look,

At Broken Hearts,

or may be Surprises.
I was busy,

waiting,

for the guy,

who would come,

Happiness,

he would bring.
I did not realize,

that,

he might be waiting,

as well,
for his happiness,

for his girl,

for his dream!!!!

Taken from an old Blog Post: Delusion Friday 22 Oct 2010