एक लम्हा या फिर एक अरसा 

अंतर जीवन के एक लम्हे का दूसरे लम्हे से- अंतराल एक लम्हे से ज़्यादा का

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ज़िन्दगी दौड़ती एक पटरी पर सालों से 

बदल गयी चाल उसकी जब एक लम्हे में

जादू ने बदल दिए चेहरे और उनके नक़ाब 

कोयले से हुए हीरे और मिट्टी से रकाब

एक लम्हा जो था यहाँ वो रहा ना आस पास 

जीती जाती ज़िन्दगी और अब रही ना बाकि एक सांस

एक लम्हा था सूरज आसमान में चढ़ता हुआ 

और उधर चाँद पूर्णिमा की और बढ़ता हुआ 

एक लम्हा ज़िन्दगी खुशियों को परवान हुई 

वहीँ आँगन में किलकारियाँ वीरान हुई

एक लम्हा जो एकटक देख रहे थे उसकी ओर 

वही आँखें खोज रही भरी दुनिया में अपना छोर 

एक लम्हा था सपने छू रहे थे आसमानों के शिखर 

टूटा हौंसला तो रेत के आशियाँ गए मिट्टी में बिखर 

ना था एक लम्हा जो था दुनिया बदल देने वाला 

सफर था यह लंबा, था लंबा उसका क़ाफ़िला